भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच खत्म हुई वनडे सीरीज में देश के दिग्गज बल्लेबाज़ विराट कोहली ने एक बार फिर साबित कर दिया कि उम्र केवल एक नंबर है। अपनी शानदार बल्लेबाज़ी के दम पर उन्होंने सीरीज में कुल 302 रन बनाए और भारत को 2-1 की जीत दिलाई। इसी प्रदर्शन के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द सीरीज चुना गया—ये उपलब्धि वे अपने करियर में 20वीं बार हासिल कर चुके हैं।
यानी विराट अब सचिन तेंदुलकर के 19 प्लेयर ऑफ द सीरीज रिकॉर्ड को भी पार कर चुके हैं।
“मुझमें भी सेल्फ डाउट होता है” – विराट की ईमानदार स्वीकारोक्ति
पोस्ट मैच प्रेज़ेंटेशन के दौरान विराट कोहली ने अपने दिल की बात दुनिया से शेयर की। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ सालों में उन्होंने जिस तरह की बैटिंग की, वैसी फीलिंग पहले लंबे समय से महसूस नहीं की थी।
उन्होंने बताया:
“कई बार ऐसा होता है कि आप खुद पर संदेह करने लगते हैं। दिमाग में डर आने लगता है, और आप उन्हीं विचारों में उलझते चले जाते हैं। लेकिन जैसे ही मैदान में रन आने लगते हैं, बड़े शॉट लगते हैं—आपका आत्मविश्वास वापस लौटता है।”
कोहली ने माना कि रांची में लगाया गया शतक उनके लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। वह मैच खेलते हुए उन्हें लगा कि उनका रिदम वापस आ रहा है। लगभग एक महीने बिना मैच खेले आने के बाद वह पारी उनके लिए खास थी।
रोहित-विराट की जोड़ी: भारतीय क्रिकेट की दो ध्रुव तारे
विराट ने बातचीत में रोहित शर्मा का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि दोनों की कोशिश हमेशा यही रहती है—टीम के लिए योगदान देना और बड़ी पारी खेलना।
पिछले 15-16 वर्षों से ये दोनों क्रिकेटर भारतीय टीम की रीढ़ बने हुए हैं और अपने करियर के अंतिम फेज में भी लगातार प्लेयर ऑफ द सीरीज जैसे बड़े सम्मान जीत रहे हैं।
सोचिए—जब टीम में युवा खिलाड़ियों की भरमार हो, तब भी दो क्रिकेटर 37-38 साल की उम्र में सीरीज के हीरो बनकर उभरते हैं। यह बात खुद में प्रेरणा है कि स्टैंडर्ड कैसे बनाए जाते हैं।
आलोचकों को बल्लेबाज़ी से जवाब
ऑस्ट्रेलिया दौरे के पहले दो मैचों में कोहली लगातार दो बार शून्य पर आउट हुए थे। आलोचना हुई, सवाल उठे, लेकिन तीसरे मैच में हाफ-सेंचुरी और उसके बाद दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ दो शतक—यह उनका जवाब था।
अगले चार मैचों में उनका स्कोर कार्ड:
- 2 शतक
- 2 अर्धशतक
यानी जो लोग कह रहे थे कि ब्रेक लंबा हो गया, लंदन में रहने से गेम पर असर पड़ा—विराट ने अपने बल्ले से सभी को खामोश कर दिया।
उनका कहना है कि लंदन में रहना हो या कहीं और, क्रिकेट के लिए उनका पैशन और मेहनत कभी कम नहीं होती। वनडे क्रिकेट में आज भी वे खुद को सर्वश्रेष्ठ मानते हैं—और प्रदर्शन भी यही दिखाता है।
पहले वाले विराट और आज के विराट में फर्क
एक समय था जब विराट मैदान पर आक्रामक भाषा, बोल्ड बयान और फायर के लिए जाने जाते थे। अब वे पहले से अलग दिखते हैं—शांत, परिपक्व और आध्यात्मिक।
वे कहते हैं कि:
“जब मैं बल्लेबाज़ी करता हूं, तभी खुद को समझ पाता हूं और एक बेहतर इंसान बनने की कोशिश करता हूं।”
यानी विराट केवल रन नहीं बना रहे, बल्कि जिंदगी को नए नज़रिये से भी जी रहे हैं।
नतीजा: कोहली की वापसी नहीं—ये उनकी निरंतरता है
कई लोग इसे विराट की ‘कमबैक’ कहानी कह रहे हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि विराट कभी कहीं गए ही नहीं। वे हमेशा खेल में मौजूद रहे—बस फॉर्म ने कुछ समय छुपन-छुपाई खेली।
अब फिर वही 2016-17 वाला कोहली दिखाई दे रहा है—जो हर पारी में रन बनाना चाहता है, टीम को जीत दिलाना चाहता है, और अपनी सीमाओं को पार करने की कोशिश करता है।
विराट कोहली का यह दौर हमें remind करता है कि महान खिलाड़ी वही है, जो शक, आलोचना और असफलता के बाद भी अपने खेल के प्रति सच्चा रहता है।

